मदन मोहन मालवीय | Madan Mohan Malaviya Biography in Hindi
मदन मोहन मालवीय
मदन मोहन मालवीय एक प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक थे.
पंडित मदन मोहन मालवीय जा जन्म एक ब्राह्मण परिवार में 1861 ई. में प्रयाग (इलाहाबाद) में हुआ था.
1884 ई. में स्नातक की परीक्षा पास करने के बाद पंडित मदन मोहन मालवीय कानून के छात्र बने.
1886 ई. में कानून की परीक्षा पास करने के बाद कांग्रेस के संपर्क में आये.
वे चार बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष रहे.
उन्हें महामना की उपाधि दी गई थी.
भारत सरकार ने हाल ही में 25 दिसम्बर 2014 को उन्हें भारत रत्न से विभूषित किया.
वे हिंदी पत्रिका “हिंदोस्थान” के सम्पादक थे.
1889 में वे “इंडियन ओपिनियन” पत्रिका के सम्पादक हुए.
उन्होंने “अभ्युदय” नामक एक हिंदी साप्ताहिक चालू किया था. इसके अतिरिक्त उन्होंने “लीडर” नामक अंग्रेजी दैनिक एवं “मर्यादा” नामक हिंदी समाचारपत्र भी चलाया था.
उन्होंने 1916 में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय स्थापित किया और 1939 तक इसके उपकुलाधिपति रहे.
उन्होंने मुसलमानों के लिए अलग चुनाव क्षेत्र और लखनऊ पैक्ट का विरोध किया था.
वे खिलाफत आन्दोलन में कांग्रेस के शामिल होने के विरोधी थे.
1931 ई. के दूसरे गोलमेज सम्मेलन में वे प्रतिभागी रहे.
गंगा पर बाँध बनाने के विरोध में उन्होंने गंगा महासभा की स्थापना की.
वे एक समाज सुधारक भी थे. उन्होंने अस्पृश्यता का विरोध किया था और महाराष्ट्र के नासिक में स्थित कलाराम मंदिर में हरिजनों के प्रवेश के लिए काम किया था.
उन्होंने वृन्दावन में श्री मथुरा वृन्दावन आशानन्द गोचर भूमि नामक एक संगठन भी स्थापित किया था.
मदन मोहन मालवीय भारत के आर्थिक विकास में दिलचस्पी रखते थे. उनके प्रयास से 1905 ई. में भारतीय औद्योगिक सम्मलेन का आयोजन बनारस में किया गया था.
1907 ई. में उत्तर प्रदेश औद्योगिक सम्मलेन का आयोजन इलाहाबाद में मालवीयजी के प्रयत्न से ही हुआ था.
